The Sentinel of Soil and Culture: The Legacy of Bhagwan Birsa Munda
यह पुस्तक भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम और संघर्षशील अध्याय को रेखांकित करती है, जिसके महानायक भगवान बिरसा मुंडा थे। मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को हिलाकर रख दिया था। यह रचना केवल उनके सैन्य विद्रोह की कहानी नहीं है, बल्कि यह उनके द्वारा किए गए सामाजिक-सांस्कृतिक सुधारों और जनजातीय अस्मिता की पुनर्स्थापना का एक जीवंत दस्तावेज है।प्रमुख विशेषताएँ:सांस्कृतिक चेतना: पुस्तक गहराई से बताती है कि कैसे भगवान बिरसा ने अपनी माटी, परंपराओं और स्वदेशी संस्कृति को औपनिवेशिक और बाहरी प्रभावों से बचाया।उलगुलान का इतिहास: जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़े गए ऐतिहासिक विद्रोह का प्रामाणिक व रोंगटे खड़े कर देने वाला विवरण।सामाजिक सुधार: अंधविश्वासों के खिलाफ उनके अभियानों और 'बिरसा संप्रदाय' के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने के प्रयासों का संकलन।यह पुस्तक इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, युवाओं और अपनी संस्कृति व गौरवशाली अतीत को जानने के इच्छुक हर पाठक के लिए एक अनिवार्य संग्रह है।
माटी एवं संस्कृति के प्रहरी भगवान बिरसा — ₹450.00
Thanks! We'll contact you shortly to confirm.